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महावीर के महावाक्य
महावीर के महावाक्य तीन मूल उपदेशों में समाए हैं: मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है, दूसरों को दुख देने वाली हिंसा त्यागनी चाहिए, और संयम से इच्छाओं पर अंकुश रखना चाहिए।
Prakrit
महावीर के महावाक्य तीन मूल उपदेशों में समाए हैं: मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है, दूसरों को दुख देने वाली हिंसा त्यागनी चाहिए, और संयम से इच्छाओं पर अंकुश रखना चाहिए।
भगवान महावीर ने पण्डितों की क्लिष्ट भाषा को अस्वीकार कर आम आदमी की लोकभाषा को धर्मोपदेश का माध्यम बनाया — यह युगप्रवर्तक भाषा-क्रान्ति थी। लेखक भाषा की शक्ति और सीमाओं, दिव्यध्वनि तथा इन्द्रभूति गौतम के प्रसंग से इसे समझाते हैं।