Research Articles
कुलपाक के माणिक स्वामी
डा० विद्याधर जोहरापुरकर के लेख की चर्चा करते हुए कुलपाक के माणिक स्वामी पर अतिरिक्त जानकारी: कन्नड कवि नागव की 'माणिकचरिते' की कथा, उसकी ऐतिहासिकता और कुलपाक के दिगम्बर क्षेत्र होने के प्रमाण।
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डा० विद्याधर जोहरापुरकर के लेख की चर्चा करते हुए कुलपाक के माणिक स्वामी पर अतिरिक्त जानकारी: कन्नड कवि नागव की 'माणिकचरिते' की कथा, उसकी ऐतिहासिकता और कुलपाक के दिगम्बर क्षेत्र होने के प्रमाण।
आद्य तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने पुरिमताल के सिद्धार्थ वन में वटवृक्ष के नीचे दीक्षा ली; जिनसेन और रविषेण के अनुसार इसी से यह स्थान प्रयाग कहलाया। लेख प्रयाग जैन तीर्थ के इतिहास, अक्षयवट और किले से मिली प्रतिमाओं पर प्रकाश डालता है।