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स्याद्वाद का व्यावहारिक जीवन में उपयोग
स्याद्वाद अपेक्षा का सिद्धान्त है। पं० चैनसुखदास न्यायतीर्थ बताते हैं कि इसे केवल शास्त्रों की चीज बना दिया गया, जबकि यह जीवन-व्यवहार का सिद्धान्त है—झगड़ों के शमन और अहिंसा के लिए उपयोगी।
चैनसुखदास न्यायतीर्थ
Author, Anekant
स्याद्वाद अपेक्षा का सिद्धान्त है। पं० चैनसुखदास न्यायतीर्थ बताते हैं कि इसे केवल शास्त्रों की चीज बना दिया गया, जबकि यह जीवन-व्यवहार का सिद्धान्त है—झगड़ों के शमन और अहिंसा के लिए उपयोगी।