Research Articles
खान-पानादिका प्रभाव
‘जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन’ — इस पुरानी कहावतको लेखक सच्ची घटनाओंसे पुष्ट करते हैं और बताते हैं कि आहार, वस्त्र तथा स्थान और वातावरणकी शुद्धि साधकके लिए क्यों आवश्यक है।
Householder's Conduct
‘जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन’ — इस पुरानी कहावतको लेखक सच्ची घटनाओंसे पुष्ट करते हैं और बताते हैं कि आहार, वस्त्र तथा स्थान और वातावरणकी शुद्धि साधकके लिए क्यों आवश्यक है।